संचार से नेतृत्व तक : सात दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों ने सीखे कॉर्पोरेट सफलता के मंत्र


रोजगारोन्मुखी कौशलों का गहन प्रशिक्षण, विद्यार्थियों को मिला भविष्य संवारने का रोडमैप


कौशल विकास ही युवाओं को बनाता है दूसरों से अलग : अतुल रायजादा


ज्ञान के साथ-साथ कौशल का होना भी बेहद जरूरी : प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता


स्किल डेवलपमेंट से ही बेहतर भविष्य का निर्माण संभव : रुचिका कोटडिया


राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.सुचित्रा गुप्ता के निर्देशन में रोजगार एवं मार्गदर्शन सेल संयोजक डॉ. संजय ठिसके, कौशल विकास, प्रशिक्षण सेल एवं प्राणीशास्त्र विभाग तथा नांदी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 7 दिवसीय "एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स ट्रेनिंग वर्कशॉप" का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का मुख्य विषय "आज का कौशल, बेहतर कल की पहचान" रहा।


कार्यशाला का आयोजन 15 से 22 सितंबर 2026 तक न्यू हॉल (गजानन माधव मुक्तिबोध हॉल) में किया गया था। समापन अवसर पर महाविद्यालय जन भागीदारी अध्यक्ष अतुल रायजादा, नांदी फाउंडेशन, रोजगार कौशल प्रशिक्षक राजनांदगांव, सुश्री श्वेता देवांगन,  नांदी फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ स्टेट कोऑर्डिनेटर, पुष्पेंद्र कुमार साहू, फ्लाईहाई करियर सॉल्यूशंस, राजनांदगांव की संस्थापक निदेशक, रुचिका कोटडिया, वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. किरण लता दामले की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।


प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित किया कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान के साथ-साथ स्किल का होना भी बहुत जरूरी है, जो व्यक्ति को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है। अनुशासन, लगन, निष्ठा और ज्ञान जीवन भर बना रहना चाहिए। यही गुण जीवन में अलग-अलग किरदारों को सफलतापूर्वक निभाने में मदद करते हैं और व्यक्तित्व को निखारते हैं।


अतुल रायजादा ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्किल डेवलपमेंट ही युवाओं को दूसरों से अलग बनाता है। आज के दौर में आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है। टीम वर्क में कैसे काम करना है, समय-सीमा में कार्य को पूरा करना और अपनी स्किल क्षमता को विकसित करना रोजगार के लिए अत्यंत आवश्यक है।


डॉ. संजय ठिसके ने प्रशिक्षण की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को कम्युनिकेशन स्किल्स, कॉन्फिडेंस बिल्डिंग, टीमवर्क, इंटरव्यू स्किल्स, प्रोफेशनल कम्युनिकेशन सहित विभिन्न रोजगारोन्मुखी कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया।


रुचिका कोटडिया ने कहा कि आज के समय में स्किल डेवलपमेंट ही विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की नींव है। उन्होंने कहा कि डिग्री के साथ-साथ कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।


प्रथम दिवस से छठम दिवस तक मुख्य अतिथि सुश्री श्वेता देवांगन और पुष्पेंद्र कुमार साहू ने सात दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को रोजगार के लिए आवश्यक प्रमुख कौशलों - संचार कौशल, आत्मविश्वास निर्माण, टीम वर्क एवं सहयोग, क्रिटिकल थिंकिंग एवं समस्या समाधान, साक्षात्कार कौशल, व्यावसायिक संचार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता एवं नेतृत्व क्षमता का गहन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में खुद को अलग और अद्वितीय कैसे बनाएं, इस पर अमूल्य मार्गदर्शन दिया और विद्यार्थियों को याद दिलाया कि उनकी व्यक्तिगत खूबियाँ ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं।


SMART लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए व्यावहारिक रोडमैप और रिज्यूमे तैयार करने के सूक्ष्म तरीकों ने प्रतिभागियों को अपने भविष्य को आकार देने के लिए उपयोगी साधन प्रदान किए हैं। साथ ही प्रभावी संघर्ष प्रबंधन के माध्यम से कॉर्पोरेट दुनिया को समझने और मजबूत नेतृत्व गुणों को विकसित करने पर उपस्थित हर व्यक्ति को सहानुभूति और जवाबदेही के साथ नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।


समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके व्यक्तित्व विकास और भविष्य की रोजगार योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। संस्था के "सशक्त बनो, सक्षम बनो, रोजगार पाओ - कौशल निखारो, भविष्य संवारो" के ध्येय को इस कार्यशाला ने सार्थक किया।


समापन कार्यशाला का संचालन डॉ. जागृति चंद्राकर ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. माजिद अली ने किया। इस अवसर पर प्रो. सोनल मिश्रा,  प्रो. करुणा रावटे, भाटिया सर सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।