प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज है : डॉ.
सुचित्रा गुप्ता
प्रेमचंद की कहानियों की समीक्षा कर मनाई गई जयंती
राजनांदगांव:- शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जी की जयंती के अवसर पर प्रेमचंद की कहानियों और उपन्यासों पर केंद्रित समीक्षा प्रतियोगिता आयोजित की गई.
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सदैव प्रासंगिक रहा है और आज भी है. उनका साहित्य भारतीय समाज का ज्वलंत दस्तावेज है.
विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय कहानी -उपन्यास आदि साहित्य की समीक्षा किस प्रकार की जाती है उसके बारीकियोंं पर विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित कराया.
विभागीय प्राध्यापक डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने विद्यार्थियों को बताया कि कहानी और उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ था. इसलिए प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया जाता है. प्रेमचंद किसानों और खेती हर मजदूरों की पीड़ा के कलमकार हैं. शुरुआत में वह आदर्शन्मुख रचनाएं लिखा करते थे बाद में वह यथार्थवादी हो गये.
समीक्षा प्रतियोगिता के अंतर्गत 13 विद्यार्थियों ने अलग-अलग कहानियों की समीक्षा की. प्रेमचंद की कहानियों के अलावा सुदर्शन और माधवराव सप्रे की कहानियों की समीक्षा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई. इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अनन्या स्वर्णकार, द्वितीय स्थान चेतना सिन्हा एवं तृतीय स्थान पर शिफा अली रही. विजेता विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और किताब पुरस्कार के रूप में प्रदान किया गया.
त्रैमासिक कोर्स `भारतीय संस्कार और संस्कृति` उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया.
हिंदी विभाग के वार्षिक एकेडमिक कैलेंडर का विमोचन प्राचार्य महोदया के द्वारा किया गया. इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय के सभी विषयों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.