शासकीयदिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालयराजनांदगांव केवनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉकेशवराम आडिल के नेतृत्व में चल रहे शोध में“ केराटिन आधारित कंडक्टिव नैनोफाइबर” बैंडेज विकसित किया गया हैजो घावों के तेजी से भरने (फास्टवाउंडहीलिंगके लिए एक अभिनव और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। इस शोध में रिसर्च स्कॉलर श्री नितेश कुमार का भी महत्वपूर्ण योगदान देरहे हैं।

            यह परियोजना अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF),SURE योजना के तहत नई दिल्ली से वित्त पोषित है। ANRF-SURE योजना राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सक्रिय शोधकर्ताओं कोसीमांत क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए समर्थन प्रदान करती हैजिसमें अधिकतम 30 लाख रुपये तक की एकमुश्तअनुदान राशि तीन वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध है। इस योजना के अंतर्गत डॉ. आडिल कोलगभग 29 लाख कि राशी प्राप्त हुई है |

            वेस्टटूवेल्थ की अवधारणा पर आधारित इस शोध में पशुअपशिष्ट (जैसे मुर्गीकेपंखभेड़ के ऊनमानव के बाल आदिसे प्राप्त प्राकृतिक प्रोटीन केराटिन का उपयोग किया गया है। इलेक्ट्रो स्पिनिंग तकनीक से तैयार ये कंडक्टिव नैनोफाइबर विद्युत चालकगुणों से युक्त हैंजो विद्युत उत्तेजना (इलेक्ट्रिकलस्टिमुलेशनप्रदान कर कोशिकाओं कीवृद्धिप्रसारप्रवासन औरऊतक पुनर्जनन को तेज करते हैं। यह सामग्री बायोकॉम्पेटिबलगैर-विषैली औरप्राकृतिक एक्स्ट्रा सेलुलर मैट्रिक्स (ECM) कीनकल करती हैजिससे घाव भरने की प्रक्रिया में संक्रमणकम होता हैऊतक तेजी से पुनर्जनित होते हैं और विशेषरूप से पुराने घावोंजलने तथा डायबिटीज संबंधी घावोंके इलाज में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। यह केराटिन आधारित कंडक्टिवनैनो फाइबरआधुनिक विज्ञानं और प्रोधोगिकी में अनेक क्षेत्रो जैसे इलेक्ट्रोनिक एवं वियरेबलयंत्र, बायोसेंसर, उर्जा भण्डारणरूपांतरण, एवं जैव चिक्तिसा जैसे मेजर एक्सीडेंट से होनेवाले, चोट, घाव, इंजुरी,मधुमेह के घावके लिए बहुत ही लाभकारी साभित हो सकता है |

            इस नवाचार से स्टार्ट-अपबिजनेस अवसरों की अपार संभावनाएं खुल रही हैं। केराटिनआधारित कंडक्टिव नैनोफाइबर से सस्तीपर्यावरण-अनुकूल और उन्नत वाउंड ड्रेसिंगबायो-मटेरियल पैचस्मार्ट बैंडेज तथा अन्य मेडिकलउत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। यह स्टार्ट-अप्स के लिए एक बड़ा बाजार प्रदान करेगाजहांअपशिष्ट से मूल्यवान उत्पाद बनाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजननिर्यात संभावनाएं और सस्टेने बलबिज ने समॉडल विकसित हो सकते हैं। डॉआडिल ने इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लेजाने और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में आगेबढ़ने की भारत सरकार कि योजना व्यक्त की हैजो 'मेक इन इंडियाऔर 'आत्मनिर्भरभारतके लक्ष्यों से जुड़ी है।

            डॉकेशवराम आदिल नेकहा, “यह शोध  केवलचिकित्सा क्षेत्र में नवाचार लाएगाबल्कि अपशिष्टप्रबंधन को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा। ANRF-SURE के   समर्थन से हम इस तकनीक को औरआगे बढ़ा रहे हैंताकि यह समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होसके।

महाविद्यालय के इस शोध कार्य केलिए प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने डॉ. केशव राम आडिल को बहुत बधाई देते हुएमहाविद्यालयपरिवार् के लिए गर्व कि बात है कहा एवं और आगे बढ़ने कि प्रेरणा देते हुएशुभकामनाये दी | इसके अत्तिरिक्त विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.अनिता महिस्वर ने आडिल को ढेर सारी बधाईयाँ दी | महाविद्यालयके सभी अधिकारी एवं कर्मचारीयो ने इस उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त किया |