कल मानव की सृजनात्मक अभिव्यक्ति है-डॉ.आर.एन.विश्वकर्मा
शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा डॉक्टर सुचित्रा गुप्ता प्राचार्य के मार्गदर्शन में 30 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स का आयोजन किया जा रहा है उद्घाटन समारोह के मुख्य वक्ता डॉ आर.एन. विश्वकर्मा पूर्व प्राध्यापक इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ थे डॉक्टर विश्वकर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन समृद्ध और निरंतर विकसित होने वाली संस्कृतियों में से एक है भारत में कला का विकास धर्म, दर्शन और समाज से गहराई से जुड़ा रहा है भारतीय कला में आध्यात्मिकता और सौदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है भारतीय कला को स्थापत्य कला, मूर्ति कला, चित्रकला एवं संगीत और नृत्य कलाओं में बांटा जा सकता है खजुराहो और कोणार्क के मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल है।
विभागाध्यक्ष डॉक्टर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इस सर्टिफिकेट कोर्स के अंतर्गत विद्यार्थियों को मौर्यकालीन, गुप्तकालीन, सल्तनत कालीन, मुगल कालीन और छत्तीसगढ़ के कलाओं की विशेषता की जानकारी प्रदान की जाएगी भारतीय कला एवं संस्कृति हमारी राष्ट्रीय पहचान है यह हमें अपने अतीत से जोड़ती है और भविष्य के लिए दिशा प्रदान करती है
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रोफेसर हिरेन्द्र बहादुर ठाकुर ने कहा कि कला को केवल तथ्यों तक सीमित न रखकर उसे उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में से जोड़कर पेश किया है इस अवसर पर सर्टिफिकेट कोर्स में भाग लेने वाल 40 विद्यार्थियों सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित थे।