’’युवा इतिहासकारों ने प्राचीन नगरी को देखें, समझे इतिहास के महत्व’’

स्थानीय शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के इतिहास के छात्र/छात्राओं का 118 लोगों का टीम इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पी. डी. सोनकर एवं प्रो. हीरेन्द्र ठाकुर के निर्देशन में प्राचीन नगरी खरौद, शिवरीनारायण तथा गुरूघांसीदास के जन्म स्थली विश्व के सबसे ऊंचा जैतखाम के दर्शन किये ।

इतिहास के छात्र/छात्राओं ने प्राचीन नगरी खरौद जहाॅं लक्ष्यलिंग स्थापित है जो सोमवंशी राजाओं के समय का है मंदिर के संदर्भ में मंदिर स्थित शीलालेख भी देखें और प्राचीन छत्तीसगढ़ के इतिहास को समझे । रामायण कालीन शिवरी तथा भगवान राम के कहानी से जुड़ा हुआ स्थल शिवरीनारायण का दर्शन कर इतिहास के महत्व से रूबरू हुए ।

गुरूघासीदास जी के जन्म स्थल गिदौदपुरी में विश्व के सबसे ऊंचा जैतखाम देखकर भावविभोर हो गये । गुरू के सिद्धान्तों के सन्दर्भ में प्रा. पी. डी. सोनकर ने विस्तार पूर्वक बताया, प्रो. हीरेन्द्र ठाकुर ने प्राचीन नगरी शिवरीनारायण तथा खरौद के प्राचीनता पर प्रकाश डाले । समाजशास्त्र के प्रो. ललिता साहू द्वारा उस काल के समाज के संदर्भ में जानकारी दिया गया तथा गुरू के द्वारा नारी उत्थान के लिये किये गये कार्यों को रेखांकित किया । प्रो. पी. डी. सोनकर द्वारा छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास के गौरवशाली क्षणों को बताया तथा युवा इतिहासकारों को कहा कि आप सब सौभाग्यशाली है, आप सब सही इतिहास लेखन करेगें ।

इतिहास के तह तक जानने एवं समझने के इस वृहद टीम में पवन कुमार, कुलेश्वर, लोमेश, हिरेन्द्र, भानु दुबे, डीगेश, पार्वती, अनिमा, तारा, पिंकी, तरूण, मोहन, गिरधर, अमित गणेश के साथ पूरे 118 छात्र/छात्राओं का दक्ष इतिहास से रूबरू हुए । इतिहास के प्रतिभावान छात्रा भानु दुबे ने कहा इस प्रकार से ऐतिहासिक स्थल पर अध्ययन-अध्यापन का कार्य इतिहास विभाग द्वारा सम्पन्न करवाना निरन्तर जारी है । इससे सीधा लाभ छात्र हित में हैं विभाग को धन्यवाद । आज हर व्यक्ति को अपने देश-प्रदेश और अपना इतिहास जानना जरूरी है ।