मन तथा ध्यान पर व्याख्यान

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के दर्शन एवं योगविभाग द्वारा संचालित त्रैमासिक सर्टिफिकेटट् रेनिंग कोर्स ’’विभिन्न बीमारियों मेें प्रभावी योग एवं ध्यान पद्धतियाँ’’ (उपचार निदान एवं मार्गदर्शन) के तत्वधान में मन तथा ध्यान विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
विभागाध्यक्ष डाॅ. एच.एस. अलरेजा ने पधारे अतिथि व्याख्याता का परिचय देते हुए कहा कि हाउस वाईफ से मृत्युन्जय योग की संचालिका तक का सफर श्री मती मंजु झा का उल्लेखनीय है स्पीक मै केसे जुड़ कर मंजु झा मैडम ने देश-विदेश में योग प्र शिक्षण दिया है। आज दर्शन एवं योगविभाग के विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ प्राप्त होगा।
अतिथि व्याख्यान हेतु आमंत्रित श्री मती मंजु झा ने बतलाया कि जिन तत्वों से ब्राम्हाण्ड बना  है उन्हीतत्वों से हमारा शरीर भी बना है।शरीर में स्थित मन के अनेक रूप है यह अहंकार से  जुड़कर बाहर की सभी वस्तुओं को मैरा कहता है किन्तु यदि आंख बंद होजाए तो सब कुछ नियंत्रित होना प्रारम्भ हो जाता है। यही ध्यान की शुरूआत है।वैसे तो ध्यान का क्षेत्र वृहद है  कि पंचकोशो पर ध्यान केन्द्रित किया जाए तो यह ध्यानसंपूर्ण व्याक्तित्व और मन को नियंत्रित करने में सहायक  होता है।
उन्होने सदन में उपस्थित सभी विद्यार्थियों को ध्यान का अभ्यास  करवाया तथा उनके द्वारा  पूछे गए प्रश्नों के उŸार दिए। उन की सहायिका सुश्री प्रीति उपस्थित थी।व्याख्यान का समापन योग प्र शिक्षिका डाॅ. नीरा सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। प्रो0 मीनाक्षी महोबिया, दर्शन एवं योग के अनेक विद्यार्थी इस अवसर पर उपस्थित थे।